Thursday, July 31, 2025

सावन मनभावन फिर आया | Saawan Manbhavan Phir Aaya

सावन मनभावन फिर आया | Saawan Manbhavan Phir Aaya


सावन मनभावन फिर आया,
घन भी घिर घिर आये।
मौज के दिन वो बचपन के,
लौट के फिर ना आये।।

गुड्डे-गुड़ियों वाला उत्सव,
और वो झूलों वाले दिन।
लहलहाती फसलों वाले,
और वो फूलों वाले दिन।।

नदियां नाले भरे हुए सब,
कीचड़ वाली  सड़कें।
छींट उड़े जब  कारों से,
बाइक वाले भड़कें।।

छतरी लेकर कोई निकले,
कोई बरसाती कोट।
लोग फिसलते, गिरते हैं,
लगती अक्सर चोट।।

बारिश आये, बिजली जाये,
पवन भी चुप हो जाये।
स्वेद बूंद जब बदन से टपके,
तब बेचैनी बढ़ जाये।।

पर देख के पेड़ों की हरियाली,
मन मेरा ये लहराये।
बस इसीलिए गर्मी सर्दी से,
बारिश ही मन भाये।।

-एम एल मौर्य

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