Thursday, July 31, 2025

एक शख्स होता है जग में, हैं जिसको कहते बाप | Ek Shakhs Hota Hai Jag Mein Jisko Kehte Baap

एक शख्स होता है जग में, हैं जिसको कहते बाप | Ek Shakhs Hota Hai Jag Mein Jisko Kehte Baap


एक शख्स होता है जग में,
हैं जिसको कहते बाप।
उसके त्याग समर्पण को,
समझ न सकते आप।।

घर में सबकी रात दिन,
वह करता है परवाह।
करे चाहतें पूरी सबकी,
खुद की कोई न चाह।।

धूप ठंड और बारिश में,
वो करे निरंतर काम।
खांसी और बुखार में भी,
ना करता वो आराम।।

फिर भी उसकी कद्र नहीं,
लगभग ही हर घर में।
बिना बाप के बच्चों को तो,
डर लगता भरे शहर में।।

बाप अगर सक्षम है घर में,
तो बच्चों के सपने हैं।
गुड्डे-गुड़ियां और खिलौने,
बाजारों के अपने हैं।।

घर की छत से भी ज्यादा,
मजबूत बाप के कंधे हैं।
एक सुरक्षित घोंसले में ही,
खुश रहते सभी परिंदे हैं।।

मान और सम्मान करो तुम,
सदा ही अपने बाप की।
होगी जग में बिना बाप की,
दो कौड़ी कीमत आपकी।।

पितृ देवो भव:

- एम एल मौर्य

सावन मनभावन फिर आया | Saawan Manbhavan Phir Aaya

सावन मनभावन फिर आया | Saawan Manbhavan Phir Aaya


सावन मनभावन फिर आया,
घन भी घिर घिर आये।
मौज के दिन वो बचपन के,
लौट के फिर ना आये।।

गुड्डे-गुड़ियों वाला उत्सव,
और वो झूलों वाले दिन।
लहलहाती फसलों वाले,
और वो फूलों वाले दिन।।

नदियां नाले भरे हुए सब,
कीचड़ वाली  सड़कें।
छींट उड़े जब  कारों से,
बाइक वाले भड़कें।।

छतरी लेकर कोई निकले,
कोई बरसाती कोट।
लोग फिसलते, गिरते हैं,
लगती अक्सर चोट।।

बारिश आये, बिजली जाये,
पवन भी चुप हो जाये।
स्वेद बूंद जब बदन से टपके,
तब बेचैनी बढ़ जाये।।

पर देख के पेड़ों की हरियाली,
मन मेरा ये लहराये।
बस इसीलिए गर्मी सर्दी से,
बारिश ही मन भाये।।

-एम एल मौर्य