एक शख्स होता है जग में, हैं जिसको कहते बाप | Ek Shakhs Hota Hai Jag Mein Jisko Kehte Baap
एक शख्स होता है जग में,
हैं जिसको कहते बाप।
उसके त्याग समर्पण को,
समझ न सकते आप।।
घर में सबकी रात दिन,
वह करता है परवाह।
करे चाहतें पूरी सबकी,
खुद की कोई न चाह।।
धूप ठंड और बारिश में,
वो करे निरंतर काम।
खांसी और बुखार में भी,
ना करता वो आराम।।
फिर भी उसकी कद्र नहीं,
लगभग ही हर घर में।
बिना बाप के बच्चों को तो,
डर लगता भरे शहर में।।
बाप अगर सक्षम है घर में,
तो बच्चों के सपने हैं।
गुड्डे-गुड़ियां और खिलौने,
बाजारों के अपने हैं।।
घर की छत से भी ज्यादा,
मजबूत बाप के कंधे हैं।
एक सुरक्षित घोंसले में ही,
खुश रहते सभी परिंदे हैं।।
मान और सम्मान करो तुम,
सदा ही अपने बाप की।
होगी जग में बिना बाप की,
दो कौड़ी कीमत आपकी।।
पितृ देवो भव:
- एम एल मौर्य
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